
डॉक्टर कुमार विश्वास का
चित्र खींचना है
आज जन्मदिन है उनका
कुमार के विश्वास का
श्रोताओं की आस का
सर्दी में भी उनको
पंखों (Fans) की प्यास है
ए सी नहीं उनके
जरा भी आस पास है
डी सी का उन्हें
नहीं अहसास है।
वैसे रहेगा तो वैसा ही
जैसा हम रखेंगे उसे
उसे कैमरा भी हो सकता है
और कुमार भी
तथा विश्वास भी।
लो बात कर लो जी
सही रखेंगे तो
सही रहेगा।
अटकेंगे पटकेंगे
तो हमें पटक देगा।
मैं तो जानना रहा हूं
सिर्फ इतना ही
कि क्या खरीद लूं
इस कैमरे को
कैप्चर करने के लिए
चित्र भी और विचित्र भी
जिनके पास है
या जो रखते हैं जानकारी
तकनीक की
वे ही बतला सकते हैं
और दे सकते हैं सलाह
कि कैसा रहेगा खरीदना
लगे हाथ बतला दें
कि कहां से खरीदूं
जहां मेरा ही चित्र
खरीदने से पहले
ही न खींच दिया जाये
मेरी जेब को
बिना पानी के ही
सींच दिया जाये।
बैटरी इसकी चार्जेबल है
और कितनी देर के लिए
है एनेबल
कितनी याददाश्त क्षमता है
चित्र परिणाम कैसे हैं
कोई दीवाना कहता है
जैसे तो हैं न ?
और कीमत कितनी है
कहां सस्ता मिलेगा
विदेश भी बतला सकते हैं
देश में तो महंगा ही मिलेगा
पूरा विश्वास है मुझे
आज कुमार विश्वास का
जन्म दिन है
अगर मेरे पास होता
तो मैं चित्र अवश्य खींचता
कुमार के प्यार का
श्रोताओं के दुलार का। 
बुधवार, १० फरवरी २०१०
डॉक्टर कुमार विश्वास का जन्मदिन है : कैनन एस एक्स 120 कैसा रहेगा (अविनाश वाचस्पति)
प्रस्तुतकर्ता
अविनाश वाचस्पति
पर
Wednesday, February 10, 2010
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लेबल: अविनाश वाचस्पति, कुमार विश्वास, कैमरा कैनन एसएक्स 120
सोमवार, ८ फरवरी २०१०
दिल्ली हिन्दी ब्लॉगर मिलन : यह हाथ किसका है ? (अविनाश वाचस्पति)
दिल्ली हिन्दी ब्लॉगर मिलन
में जो भी आये थे
इस हाथ से अपना हाथ
जरूर मिलाये थे।
बतलाइये पहचानिये
और बतलाइये
यह हाथ किसका है ?
डॉ. टी एस दराल जी से पूछना मना है
वैसे हाथ नहीं पहचान पा रहे हैं
तो जिनके चेहरे छिप रहे हैं
उन्हें सामने लाइये
अरे नहीं भाई
इस हाथ को मत हटाइये
सिर्फ उनके नाम बतलाइये।
प्रस्तुतकर्ता
अविनाश वाचस्पति
पर
Monday, February 08, 2010
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रविवार, ३१ जनवरी २०१०
आज सनडे है जरूरी तो नहीं सूरजदेव पधारेंगे ही (अविनाश वाचस्पति)

आज सनडे है
जानकर
आशा गर्म हुई
सर्दी से राहत की
पर जरूरी नहीं
सनडे है आज
तो सूरज पधारे
सनडे तो सदैव
होता है सप्ताह में
गर्मी में भी
सर्दी में भी
बारिश में भी
पतझड़ में भी
वसंत में भी
सूची ...
लांबी है
सनडे हमने बनाया है
सूरज हमने नहीं बनाया
मौसम हमने नहीं बनाये
सूची हम बना सकते हैं
सर्दी गर्मी बारिश भी
बना सकते हैं
पर नहीं फुसला सकते
रखकर नाम ऐसा
न सूरज को
न मौसम को
न बारिश को।
कुछ काम करें ऐसा
पर्यावरण सुधर जाये
इतनी गंदगी न फैलायें
यमुना में भी न बहायें
न बहायें किसी भी पानी में
पर हम मानते नहीं हैं
मानेंगे भी नहीं
हम ऐसे इंसान हैं
जो सबसे परेशान हैं
सबको करते परेशान हैं
परेशानी का आसमान
सबसे महान है
पर नहीं मानते हम
हम ही दुनिया जहान हैं
हम ही भगवान हैं।
प्रस्तुतकर्ता
अविनाश वाचस्पति
पर
Sunday, January 31, 2010
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लेबल: अविनाश वाचस्पति
मंगलवार, २६ जनवरी २०१०
हिन्दी ब्लॉगर को पद्म पुरस्कार (अविनाश वाचस्पति)
क्या कोहरा कभी छंटेगा
और उससे देश को दिखेगा
हिन्दी ब्लॉगर कोई
जिसे दे सकें वे
पद्म पुरस्कार कोई
श्री,श्रीमती,सुश्री
भूषण, आभूषण,विभूषण।
सब चाहेंगे
उसे ही मिल जाये
पर मैं चाहूंगा
मिले आपको
जिससे हिंन्दी ब्लॉगिंग का
स्वरूप कोहरे से बाहर
निकल कर चमक दमक जाये।
प्रस्तुतकर्ता
अविनाश वाचस्पति
पर
Tuesday, January 26, 2010
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शनिवार, २३ जनवरी २०१०
कल रविवार को हिन्दी ब्लॉगिंग में अवकाश रखें (अविनाश वाचस्पति)
आप मैं और सब
रम गए हैं
हिन्दी ब्लॉगिंग में अब
इतने गहरे तक
भीतर तक
क्या
कल रविवार
24 जनवरी 2010
के दिन अवकाश
रख सकते हैं
मतलब
न तो करें पोस्ट
न करें टिप्पणी
न पढ़ें
न टिपियायें
पूरा दिन खाली रहें
कंप्यूटर को छोड़ दें
बिल्कुल न छेड़ें
लैपटाप को भी
और फिर एक दिन
करें कुछ ऐसा
मोबाइल को करें
स्विच ऑफ
क्या कर ?
पर क्या मस्ती बरकरार रहेगी
या कम हो जायेगी
एक दिन अलग
कुछ ऐसा करें
न सही कल रविवार
26 जनवरी को ही सही
पर एक दिन तो करें
आप क्या सोचते हैं
क्या लीक से हटकर
चलना पॉसीबल है ?
प्रस्तुतकर्ता
अविनाश वाचस्पति
पर
Saturday, January 23, 2010
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सोमवार, ११ जनवरी २०१०
बुर्ज दुबई की सबसे ऊपर की मंज़िल पर मैं - अभिव्यक्ति के लिए लिखिए (अविनाश वाचस्पति)
आइये हम सब लिखें और शामिल हों :-
एक लेख अभ्यास का भी रूपरेखा बनी। इस लेख का विषय सुझाया प्रकाश ने- "बुर्ज दुबई की सबसे ऊपर की मंज़िल पर मैं"। बाकी कल्पना लेखक के ऊपर छोड़ दी गई है। आप वहाँ कैसे पहुँचे कैसे अकले (या दुकेले या सपरिवार या मित्रों के साथ) वहाँ रह गए और फिर आपके साथ क्या हुआ इस सबकी कल्पना करते हुए लेख, व्यंग्य, एकांकी या कहानी चौपाल के सदस्यों को लिखनी है। शब्दों की संख्या १५०० से अधिक न हो। (शब्द संख्या का बंधन केवल अभिव्यक्ति में प्रकाशित होने के लिए है।) अभिव्यक्ति के लेखक या पाठक भी इस विषय पर लिखना चाहें तो उनका स्वागत है। इन रचनाओं का पाठ चौपाल में होगा और चुनी हुई रचना अभिव्यक्ति में प्रकाशित की जा सकती चुने हुए पाठों की ऑडियो रेकार्डिंग इस ब्लॉग पर देने का यत्न करेंगे।
प्रस्तुतकर्ता
अविनाश वाचस्पति
पर
Monday, January 11, 2010
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लेबल: साभार अभिव्यक्ति
बुधवार, ६ जनवरी २०१०
दैनिक जनसत्ता में दूसरा हरियाणा अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह (अविनाश वाचस्पति)

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और पढ़ जाइये पूरा समाचार
विहंगावलोकन कह सकते हैं
आप इस समाचार को
जिसका शीर्षक है
सिनेमा की समझ,
सिनेमा का उत्सव
पढ़ें मिलकर हम सब।
प्रस्तुतकर्ता
अविनाश वाचस्पति
पर
Wednesday, January 06, 2010
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