ब्लॉगिंग एक ऊर्जा है
जानते हैं सिर्फ ब्लॉगर
पहचानते हैं सिर्फ ब्लॉगर
ही नहीं, वे भी, जो
इसे पढ़ते भी हैं
और करते हैं टिप्पणी.
टिप्पणी ऐसी जो
झकझोर दे अंतर्मन को
ब्लॉगिंग के दीवाने लोग
मन से विचारों से जुड़ते लोग
सीढ़ियों पर चढ़ते उतरते लोग.
बगीची, वाटिका, मोहल्ला
नुक्कड़,चवन्नी चैप,उड़न तश्तरी
प्रेम ही सत्य है, बतलाते अजदक
से बतियाते, चौखट पर छा जाते
चक्रधर की चकल्लस से चकियाते
फुरसतिया, मसिजीवी और
पूंजी बाजार का हाल बताते
धमाल मचाते,मिर्ची सेठ बन जाते
चिट्ठाचर्चा चलाते,टहलते फिरते
गुस्ताख, पर करते नहीं गुस्ताखी
मन को जीतने की है उनकी
हमारी सबकी बाजी.
एग्रीग्रेटर्स ब्लॉगवाणी, चिट्ठाजगत
नारद, सर्वज्ञ,हिन्दी ब्लॉग्स ने
जिम्मेदारी संभाली
एक नई पहचान जुटा दी.
इस परिवर्तन को
हम सब सहेजें
ऊर्जा मंथन को।
गोवा से
Thursday, November 29, 2007
ब्लॉगिंग एक ऊर्जा है
प्रस्तुतकर्ता
अविनाश वाचस्पति
पर
Thursday, November 29, 2007
लेबल: अग्रिग्रेटर, कविता, ब्लोग
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5 टिप्पणियाँ:
वाह, वाह । बढिया ब्लाग कविता ।
शुक्रिया ।
आरंभ : शिवरीनारायण देवालय एवं परंपराएं
वाह वाह ! सुन्दर
वाटिका बगीची आप की खिली रहे
हमारी पहचान भी उसमें महकती रहे !!
एक जूनून है
एक तपस्या है
एक भक्ति है
एक शक्ति है
ठीक कहा है मिहिरभोज ने- सचमुच यह एक जुनून है ! ब्लागिंग अगर सही दिशा में होती रहे तो क्या कहने!
वाचस्पति जी, आपकी प्रतिक्रिया मेरी उम्मीद से बढ़कर है। शुक्रिया
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