Saturday, December 29, 2007

तरह बेतरह की नींद

खुल गया है अब यह राज
नींद सेहत की है सरताज
बनती सारी यादें नींद में

नींद की कमी से भी
होती है हाइपरटेंशन
क्या क्या करें मेंशन

कम सोना ज्यादा अच्छा नहीं है
इम्यून सिस्टम जाता है बिगड़
होती है मुंह में बदबू की गड़गड़

नहीं होता है कंट्रोल नींद पर
खूब सोते हैं नहीं होती है पूरी
कम सोने पर भी नहीं अधूरी

करती है कमाल कई
बनाती है बवाल कई
तरह तरह की नींद है

तरह बेतरह की नींद
सबकी चितेरी नींद
तरह तरह की नींद

1 टिप्पणियाँ:

सुभाष नीरव ने कहा…

नींद तो भाई किसको प्यारी नहीं होती, खासकर भोर की नींद। पर जाते वर्ष में नींद को छोड़ो, करो उठने-जगने की बात, ताकि कर सकें स्वागत नव वर्ष का! सोते नहीं रहना है, नए साल में करने हैं बहुत से काम अच्छे-अच्छे जो नहीं कर पाए बीते रहे साल में।