गोवा के मुर्गे
देते हैं बांग
बिल्कुल रांग
समझ नहीं पाया
मैं उनका स्वांग।
उनका अहसास
कैसे रांग हो गया
या प्रदूषित हो गया
या गाते हैं सांग ?
इंसान नहीं देता बांग
पर हमेशा रांग
फिर भी ऊपर टांग.
टांग सके तो टांग
मुर्गा तो बांगेगा
बिना रूके
आदमी कैसे टांगेगा
बिना झुके
झुकना ही टांगना है
महबूब का मांगना है।
Wednesday, November 28, 2007
गोवा के मुर्गे
प्रस्तुतकर्ता
अविनाश वाचस्पति
पर
Wednesday, November 28, 2007
2
टिप्पणियाँ
सदस्यता लें
संदेश (Atom)