सरकार हाथी पालती है
इंसान हाथही साधता है
जारी रहीं ऐसी सलाहें
बिकेंगी जल्दी हवायें
जमीन बिक रही है
खरीदक बिक रहे हैं
पानी बिक रहा है
पीवक बिक रहे हैं
जिंदगी बिक रही है
मौतक बिक रहे हैं
हाथ साध लो अगड़म जी
बिक रहा जो बगड़म जी
हाथ साधना ऐसी कला
करो इससे सबका भला
इस लिंक कों भी किल्कें http://wahmoney.blogspot.com/2008/01/blog-post_16.html
Wednesday, January 16, 2008
चजइ - बिकेंगी जल्दी हवायें
प्रस्तुतकर्ता
अविनाश वाचस्पति
पर
Wednesday, January 16, 2008
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
0 टिप्पणियाँ:
एक टिप्पणी भेजें