जो भारत के लिये लिखे
वो रत्नों का रत्न महारत्न
जो भारत के लिये जिये
उसे नहीं चाहिये कोई रत्न्
Friday, January 25, 2008
भारत महारत्न
प्रस्तुतकर्ता
अविनाश वाचस्पति
पर
Friday, January 25, 2008
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
अभिव्यक्ति की हिन्दी साहित्य में अनुगूँज और सृजन सहयात्रियों का सेतु
जो भारत के लिये लिखे
वो रत्नों का रत्न महारत्न
जो भारत के लिये जिये
उसे नहीं चाहिये कोई रत्न्
प्रस्तुतकर्ता
अविनाश वाचस्पति
पर
Friday, January 25, 2008
1 टिप्पणियाँ:
माँगने वालों के लिए सौ टके की बात....
वजीफा मिल जाए उन्हें हाथोंहाथ
एक टिप्पणी भेजें