पॉवर में नहीं पाव भर
अद्धा भी नहीं बोतल है
इस शेयर में शेर बसा
पूरा सेंसेक्स चल बसा .
सबको ढीला कर डाला
डाल गले हार की माला
निकला बाज़ार का दिवाला
निवेशक हुआ मतवाला है .
आस्था अडिग रिलायंस में
अम्बानी वाली साइंस में
नहीं कोई और चायस है
इस शेयर में साइंस में .
दिल है इसमें दिमाग भी
आत्मा भी प्राण भी बसे हैं
सट्टा नहीं है मजबूत बाट
इसे पाएं तो होवें सभी ठाठ .
Wednesday, January 16, 2008
सेंसेक्स चल बसा
प्रस्तुतकर्ता
अविनाश वाचस्पति
पर
Wednesday, January 16, 2008
लेबल: कविता, रिलायंस पॉवर, सेंसेक्स
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
0 टिप्पणियाँ:
एक टिप्पणी भेजें