ब्लॉग पर हो रहे हैं झगड़े
और मैं झगड़ों से रहता हूं दूर
मुझे नहीं पसन्द हज़ूर .
जब हो जायें दूर
गिले शिकवे
और लड़ लें
सब भरपूर
तब मुझे
बतलाना ज़रूर
मैं आ जाऊंगा हज़ूर.
पर गाली गलौच
को नाम देना
भड़ास
मुझे नहीं
मंज़ूर.
इसलिये होता हूं
दूर
इसे बुरा मत मानें
जाने और अनजाने
सभी मित्र मेरे.
Saturday, March 1, 2008
भड़ास से अलग हो गया हूं मैं ?
प्रस्तुतकर्ता
अविनाश वाचस्पति
पर
Saturday, March 01, 2008
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4 टिप्पणियाँ:
ओके. नो प्राब्लम.
सही है...कोई गाली गलौच से बचना चाहता है...इसलिए भड़ास को छोड़ देता है...
किसी से किसी और कारण भड़ास की मैम्बरशिप छुड़वा दी जाती है ....
खैर...जो भी होता है...शायद अच्छे के लिए ही होता है
well done.
वाक़ई बहुत ख़ूब लिखा है आपने हज़ूर
यह सब मेरे मुट्ठी में होंगे एक दिन ज़रूर,
बोलो तो कर दूं एक मिनट में सबको चकनाचूड़ :-)
hehehehe....पढ़ कर मज़ा आया.
rgds,
rewa
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