Friday, January 18, 2008

चजइ - सात सौ का सदमा


गिर गया गिर गया गिर गया भैया
लुढ़क गया लुढ़क गया ता ता थैया
बाजार का पखेरु उड़ा टूट गया पैया
शेयर बह गये सेंसेक्स में डूबी नैया

भरा गिलास यों ही चटक गया रे
चमकदार शीशा तो खटक गया रे
सात सौ का सदमा पटक गया रे
कितने ही अरब ये गटक गया रे

इतिहास बना आज बिकवाली का
नोट नहीं चला जैसे टकसाली का
मान न बना देखो अब साली का
रुतबा बढ़ गया यारो घरवाली का

रच गया रचा गया एक इतिहास
गंभीर बात बनी है नहीं परिहास
खूब किया मन टन भर उल्लास
धैर्य करें धारण पूरे होंगे विलास