Monday, January 28, 2008

उठता संभलता फिर मारता बाजार

जैसे जैसे बढ़ता रहा है पाला रे
बाजार गिरता रहा है स्साला ये

ब्यान आया है जब सत्ताधारी का
हो गया है गर्म शेयर बाज़ार का

बढ रही सर्दी और गिर रहा बाजार
उठता संभलता फिर मारता बाजार

चढ़ाता बुखार है बाजार कम्बखत
मौसम से परेशान अब हर शख्स

नेताओं की बक बक देती ताकत
बनती बाद में बाज़ार की गिरावट